हमारा परिचय

भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू के द्वारा भारत की स्वतंत्रता के जल्द ही बाद बाल चित्र समिति, भारत स्थापित की गयी, जिनका बच्चों के प्रति स्नेह प्रसिद्ध है. पंडित नेहरूजी ने सी एफ एस आई की स्थापना इस उम्मीद से की ताकि बच्चों के लिए स्वदेशी एंव विशेष सिनेमा से उनकी रचनात्मकता, करुणा, और महत्वपूर्ण सोच को प्रोत्साहित कर सके.

अध्यक्ष, पंडित हृदय नाथ कुंजरू के साथ सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन सी एफ एस आई ने एक स्वायत्त निकाय के रूप 1955 में कार्य शुरू किया. सी एफ एस आई का पहला ‍निर्माण जलदीप ने 1957 वेनिस फिल्म समारोह में सर्वश्रेष्ठ बच्चों की फिल्म के लिए प्रथम पुरस्कार जीता. तब से सी एफ एस आई ने फीचर फिल्मों, शॉर्ट्स, एनिमेशन से टीवी एपिसोड और वृत्तचित्रों द्वारा बच्चों के लिए निर्माण, प्रदर्शन और गुणवत्ता सामग्री वितरित जारी रखा है.

कई वर्षों से भारतीय सिनेमा के कुछ प्रतिभाशाली, जैसे – मृणाल सेन, सत्येन बोस, तपन सिन्हा, के अब्बास, श्याम बेनेगल, एमएस सथ्यू, सई परांजपे, बुद्धदेब दासगुप्ता, संतोष सिवन, राम मोहन, रितुपर्णो घोष और पंकज अडवाणी ने हमारे फिल्मों का निर्देशन किया है. उन्हे कई अन्य नए कल्पनाशील फिल्म निर्माताओं जुड़े है, जिन्होने देश में सबसे आनंदमय बच्चों की सामग्री का निर्माण किया है.

सी एफ एस आई ऐसी फिल्मों को बढ़ावा देता है जों बच्चों का स्वस्थ और सर्वांगीण मनोरंजन प्रदान करकॆ उनका दृष्टिकोण व्यापक और दुनिया की चारों ओर सॆ प्रतिबिंबित करने में प्रोत्साहित कर सके. 10 अलग भाषाओं में, 250 फिल्मों की स्पृहणीय सूची के साथ, सी एफ एस आई दक्षिण एशिया में बच्चों की फिल्मों का मुख्य निर्माता रहा है.

हम देश भर में फिल्म प्रदर्शन का भी आयोजन करते है, जहां सालाना लगभग चालीस लाख बच्चे लाभ उठातॆ है.
भारत में बच्चों कॆ फिल्मों के आंदोलन को मजबूत बनाने के लिए और दुनिया भर में भारतीय निर्मित बच्चों कॆ फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए सी एफ एस आई प्रतिबद्ध है।

श्रीमती स्वाती पांडे
मुख्य कार्यकारी अधिकारी

कला प्रेमी, ख़ास तौर से सिनेमा के प्रति गहरा प्रेम रखने वाली स्वाति पांडे को कई वर्षोँ का प्रशासनिक, ब्रोड बेस्ड इंटरफेस कम्युनिकेशन तथा आउटरिच विशेषज्ञ हैं. उन्होने भारतीय डाक विभाग तथा परमाणु ऊर्जा विभाग को सेवाएँ दी हैं और फिलहाल फिल्म डिविजन को प्रशासनिक मुखिया तथा सीएफएसआई को मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में सेवाएँ दे रही हैं.

१९९७ बैच की आईपीओएस अधिकारी श्रीमती पांडे ने एचआर तथा ग्रामीण विकास में एमबीए किया है. वह एंथ्रोपोलोजी में मास्टर्स (परास्नातक) तथा फ्रेंच में डिप्लोमाधारी भी हैं. उन्हे ग्रामीण क्षेत्रो में ज़मीनी स्तर पर काम करने वाली एजेंसियो के साथ काम करने का गहरा अनुभव है तथा डॉक्युमेंट्री फिल्मो के निर्माण व प्रोत्साहन हेतु जन संवाद एवँ पहुँच और मेल-जोल के लिए एमओएस, गृह मामलो के मंत्रालय, भारत सरकार एवँ वन विभाग, महाराष्ट्र से उन्हे पुरस्कृत व प्रशँसित भी किया गया है.

स्वाति पांडे को फिल्म्स डिवीजन में अल्प समयावधि में प्रशासनिक, मानव संसाधन तथा फिल्म निर्माण की व्यवस्थाओ को सुचारु करने का दायित्व दिया गया था. सीएफएसआई में सीईओ के रूप में उन्होने देशभर में विभिन्न हितधारकों की समावेशी सहभागिता सुनिश्चित करके बाल फिल्मों को लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई है. बाल फिल्मों के माध्यम से सभी क्षेत्रों में युवाओ तथा बच्चों तक पहुंच बढ़ाने के लिए उन्होने फील्ड युनिटों को नया जीवन दिया है. यात्राओ की शौकीन श्रीमती पांडे दुनिया के हर कोने से मित्र बनाने के लिए जानी जाती हैं और कार्यस्थल पर नई ताज़गी और उत्साहपूर्ण माहौल सृजित करती हैं. इसके अलावा उनका मुख्य ध्येय सीएफएसआई फिल्मों को ग्रामीण क्षेत्रों में ले जाना और बच्चों के बीच फिल्म निर्माण कार्यशालाएँ आयोजित करते हुए कई नन्हे दिलो में फिल्म निर्माण के प्रति उत्साह सृजित करना है.