भारत के पहले
प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरूजी जिनके बच्चों के प्रती
लगाव मशूर है जिसे फिर दोहराने की जरुरत नही उन्की धारणा थी
की भारत के बच्चों लिए अलग सिनेमा बनय जाय्। पंडित रिदयनाथ कुनजरु
के सौम्य अध्यक्षता के तहत 11 मई 1955 को बाल चित्र समिति, भारत
(सीएफएसआई)की स्थापना प्रेरित पंडित नेहरूजी से मिली
समिति, का धेय था की बच्चों
के लिए फीचर एव लघु फिल्मों का निर्माण, वितरण तथा प्रदर्शन
उदयम एव संगठीत करना सश्कत रुपसे मनोरंजन देना, उनका ध्यान बधाने
के उद्देश्य से उनके चरित्र का विकास, उनकी दृष्टि का विस्तार
करना तथा आधुनिक भारत के उपयोगी नागरिकों बनाने मे मददत करना
।
सीएफएसआई ने इस कारोबार में
लगभग तुरंत अपनी पेहली निर्मिति ' जलदिप ' नामक एक रोमांचक कहानी
जो एक दिप स्तंभ पर केन्द्रित है. इस फिल्म को 1957 वेनिस फिल्म
समारोह में बच्चों की फिल्मों के लिए प्रथम पुरस्कार प्रप्त
हुवा।
केदार शर्मा, सत्येन बोस,
मोहन कौल और राजिन्दर शर्मा जैसे कई प्रतिभाशाली और प्रतिबद्ध
फिल्म निर्माताओं, बच्चों के लिए फिल्में बनाने के लिए उत्साहित
हूये. मृणाल सेन, श्याम बेनेगल, तपन सिन्हा जैसे दिग्गजों, साई
परांजपे उन्हें शामिल हो गए. इसके अलावा, सीएफएसआई एनीमेशन और
कठपुतली फिल्मों साथ ही लघु वृत्तचित्रों और समाचार पत्रिकाओं
बच्चों के लिए विशेष हित के विषयों पर निकाले गये. . उत्कृष्ट
बच्चों की फिल्में अन्य देशों सेभी प्राप्त किए गए। इसका सुखद
परिणाम के रूप में, देश के भावि नागरिकों के लिये मूल फ़िल्मों
का एक स्प्रूहाणीय संग्रालय तैयार किया गया. |